LGNS Price क्यों Down? 98% crash का कारण?
LGNS ने कभी $80dollars के ऊपर का प्राइस देखा था। लेकिन आज इसकी कीमत उसे लेवल से लगभग 98% से ज्यादा नीचे है। लेकिन असली सवाल यह है क्या LGNS सिर्फ मार्केट की वजह से गिर रहा है या इसके अपने टोकोनॉमिक्स में ही प्राइस प्रेशर छुपा हुआ है ? आज के इस एक्सप्लेनर में हम ऑन चैन डाटा के जरिए इस मिस्ट्री के पीछे का सच इन्वेस्टिगेट करेंगे। 98% की भारी गिरावट सच में यह कोई छोटा नंबर नहीं है। क्या यह सिर्फ जनरल क्रिप्टो मार्केट का नार्मल प्रेशर है या फिर इस टोकन के अपने एक्सपेंशन मैकेनिक्स यानी इसके काम करने के तरीके में ही कोई हिडन डाउन वार्ड फोर्स कोई गहरा दबाव छुपा है । लेकिन असली खेल अब शुरू होता है। बस आगे बढ़ने से पहले एक क्लियर डिस्क्लेमर यह एक्सप्लेनर सिर्फ एजुकेशनल और इनफॉरमेशन पर्पस के लिए है। यह फाइनेंशियल एडवाइस बिल्कुल भी नहीं है। LGNS को BUY या SELL या HOLD करने कोई रेकमेंडेशन यहां नहीं दी जा रही । Crypto हाईली वोलेटाइल और रिस्की है। इसलिए इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी इंडिपेंडेंट रिसर्च जरूर करे। तो चलिए सबसे पहले बेसिक क्लियर करते हैं। LGNS असल में क्या है ?
यह Poligon नेटवर्क पर बना एक प्रोटोकॉल है । लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह एक नॉर्मल फिक्स्ड सप्लाई एसेट से काफी अलग है। LGNS असल में एक रिबेस टोकन है। अब नॉर्मल टोकेंस में सप्लाई जनरली फिक्स होती है राईट? लेकिन एक रिवेंज टोकन मे प्रोटोकॉल लगातार नए Token mint करता है यानी छपता है ताकि होल्डर को वह बहुत ही अट्रैक्टिव डेली Stacking Rewards दिए जा सके और यही पर सबसे जरूरी कॉन्सेप्ट आता है। टोकन क्वांटिटी बढ़ाना डॉलर वैल्यू बढ़ाने के बराबर नहीं है। एक सिंपल हाइपोथेटिकल एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए Stacking की वजह से वॉलेट में टोकन 100 से बढ़कर 200 हो गए। सुनने में बहुत अच्छा लगता है। लेकिन अगर उसी दौरान उसे टोकन का प्राइस $1 डॉलर से गिरकर 40 सेंटेंस हों जय तो असल डॉलर वैल्यू तो कम हो गई ना। अब आते हैं पक्के सबूत पर यानी ऑन चेंज सप्लाई डाटा देखते हैं नंबर्स क्या कहानी कह रहे हैं। इस नंबर को ध्यान से समझिए। लगभग 4.8B (Billion) यानी करीब 480 टोकेंस। रिसेंट डाटा स्नैपशॉट के दौरान LGNS की टोटल सप्लाई इतनी ही थी। यह एक बहुत ही मैसिव फउंडेशनल मैट्रिक है जिस पर इस पजेक्ट की पुरी टोकोनॉमिक्स टिकी हुई है और इंटरेस्टिंग बात यह है कि इस 4.8B (Billion) सप्लाई का लगभग 95% हिस्सा स्टॉकिंग कांट्रैक्ट्स के अंदर लॉक है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह 95% टोकेंस मार्केट में बिकने के लिए अवेलेबल नहीं है। योर टेंपरेरी सेलिंग को रोकता जरूर है। लेकिन साथ ही या लगातार नए रिवार्ड्स जनरेट करने का एक बहुत बड़ा ना रोकने वाला इंजन भी बना हुआ है। अब समझते हैं इस रिबेस का असली असर और डेली मीटिंग को यह स्टाकिंग रिवॉर्ड असल में सप्लाई को कितनी तेजी से बढ़ा रहे हैं। ऑन चैन उत्तर हमें दिखता है कि रिबेस मैकेनिक्स के जरिए हर दिन लगभग 45 मिलियन नए टोकन mint हो रहे थे । जी हां 45 मिलियन नई सप्लाई हर एक दिन मार्केट में आ रहे थी। यहीं पर एक बड़ा सवाल सामने आता है। अगर सप्लाई इतनी तेजी से एक्सपेंड हो रही है तो इन नई छपी हुई टोकेंस को खरीदने के लिए मैचिंग डिमांड कहां से आएगी ? सिंपल इकोनॉमिक्स अगर डिमांड सप्लाई की स्पीड से मैच नहीं करती तो प्रिंस स्टेबल कैसे रह सकता है? इस मैथमेटिकल रियलिटी वह गहराई से समझने के लिए चलिए एक 7 Days स्नैपशॉट देखते है । सिर्फ 7 दोनों के डाटा स्नैपशॉट पर नजर डालें तो staked balance 6.2% बढ़ा। नेट रिवेंज सप्लाई में 365 मिलियन नए टोकेंस जुड़ गए। लेकिन टोकन का प्राइस 5.6% गिर गया। रिवॉर्ड सुनने में अच्छा लगता है लेकिन पिक्चर का दूसरा साइड क्या है? टोकेंस बढे और प्राइस नीचे गया। इसके साथी लिक्विडिटी के रोल को समझना बहुत की जरूरी है। On chain रिपोर्ट्स के मुताबिक LGNS और DAI थे लक्विडिटी पुल लगभग 70 मिलियन का था। लिक्विडिटी असल में मार्केट की डेप्थ तय करती है।
जब बड़े व्हील्स यह होल्डर अपना स्टिकट अमाउंट अनलॉक करके सेल करने का फैसला करते हैं तो यही लिक्विडिटी प्रिंस मूवमेंट को भारी रूप से इन्फ्लुएंस करती हैं। लेकिन रकिए प्रोटोकॉल के पास कुछ बचाव के तरीके भी है। जैसे बर्न और बायबैक । यहां एक बहुत इंपॉर्टेंट बैटल चल रही है। एक तरफ बहुत तेजी से टोकेंस mint हो रहे हैं और दूसरी तरफ लिक्विडिटी पुल बर्न और बायबैक से उन्हें डिस्ट्रिय करने की कोशिश हो रही है।
असली सवाल यह है कि क्या यह बर्निंग प्रोसेस इतनी एग्रेसिव सप्लाई एक्सपेंशन को रियलिस्टिकली आप सेट कर सकता है?
अब यह कुकंलूजन देना गलत होगा कि LGNS सिर्फ रिबेस की वजह से गिर रहा है। प्रिंस मूवमेंट हमेशा मल्टीपल फैक्टर से प्रभावित होता है। मार्केट सटीमेंट, प्रॉफिट टेकिंग, वेल्स की लिक्विडिटी मूवमेंट और ऑर्गेनिक डिमांड का काम होना यह सभी बहुत बड़े फैक्टर होते हैं।
तो फिर इन सब से बीच असल में क्या देखना चाहिए ? इसके लिए यह एसेंशियल मैट्रिक्स चेक लिस्ट बहुत कम आती है। डेली नेट सप्लाई कितनी बढ़ रही है ? रिबेस रेट क्या है?
अनस्टेकिंग वॉल्यूम और डीएक्स लिक्विडिटी कितनी है? एक्चुअल ऑर्गेनिक डिमांड है भी या नहीं ? सिर्फ सर्फेस लेवल एपी वाई या रिवॉर्ड परसेंटेज को देखकर अंधाधुन घ फैसला लेना सही नहीं है। इन अंडरलाइन मैट्रिक्स को ट्रैक करना बेहद जरूरी है। यही पॉइंट LGNS की पूरी इकोनॉमिक्स समझने के लिए सबसे जरूरी है।
10000 टोकेंस होना और असली परचेसिंग पावर होना दोनों एक ही बात नहीं है। हाई यील्डस ऑटोमेटेकली वेल्थ की गारंटी नहीं देते क्योंकि अगर टोकन की वैल्यू लगातार गिर रही है तो असल प्रॉफिट तो वैसे ही गायब हो जाता है। चलिए अब आते हैं हमारे गिर रही है तो असल प्रॉफिट तो वैसे ही गायब हो जाता है । अब आते हैं हमारे फाइनल वर्डिक पर और समझते हैं इसके अंडरलाइन मैकेनिक्स को।
कंक्लुजन बहुत ही क्लियर है। LGNS को सिर्फ APY देखकर जज करना सही नहीं है। यहां सप्लाई ,डिमांड, लिक्विडिटी, मीटिंग और बर्निंग सभी के साथ में दिखाना होता है। अगर टोकन क्वांटिटी तेजी से बढ़ रही है लेकिन ऑर्गेनिक मार्केट डिमांड इस स्पीड से नीचे नहीं बढ़ रही तो प्रिंस पर एक स्ट्रक्चरल डाउन वार्ड प्रेशर आना बिल्कुल तय है तो अंत में याद रखने वाली बात यह है कि क्रिप्टो में सिर्फ रिवॉर्ड मत देखिए ।
रिवॉर्ड के पीछे का मेकैनिज्म देखिए। किसी भी सिस्टम हिस्सा बनने से पहले उसकी इकोनॉमिक्स को गहराई से समझना पड़ता है। रिसर्च पहले इन्वेस्टमेंट बाद में। इसी सोच के साथ आज के इस एक्सप्लेनर को यहीं समाप्त करते हैं।
लेकिन जाते-जाते एक सवाल अगली बार जब कोई प्रोटोकॉल 10000% APY का दावा करेगा तो क्या नजर सिर्फ ना पेपर होगी या उसे मुनाफे पर होगी या उसे मुनाफे को छापने वाली मशीन पर होगी?
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